Job 41
| Berean Standard Bible tier 2 | Hindi Contemporary Version tier 3 |
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| BSB 1 “Can you pull in Leviathan with a hook or tie down his tongue with a rope? | HINCV 1 “क्या तुम लिवयाथान को मछली पकड़ने की अंकुड़ी से खींच सकोगे? अथवा क्या तुम उसकी जीभ को किसी डोर से बांध सको? |
| BSB 2 Can you put a cord through his nose or pierce his jaw with a hook? | HINCV 2 क्या उसकी नाक में रस्सी बांधना तुम्हारे लिए संभव है, अथवा क्या तुम अंकुड़ी के लिए उसके जबड़े में छेद कर सकते हो? |
| BSB 3 Will he beg you for mercy or speak to you softly? | HINCV 3 क्या वह तुमसे कृपा की याचना करेगा? क्या वह तुमसे शालीनतापूर्वक विनय करेगा? |
| BSB 4 Will he make a covenant with you to take him as a slave for life? | HINCV 4 क्या वह तुमसे वाचा स्थापित करेगा? क्या तुम उसे जीवन भर अपना दास बनाने का प्रयास करोगे? |
| BSB 5 Can you pet him like a bird or put him on a leash for your maidens? | HINCV 5 क्या तुम उसके साथ उसी रीति से खेल सकोगे जैसे किसी पक्षी से? अथवा उसे अपनी युवतियों के लिए बांधकर रख सकोगे? |
| BSB 6 Will traders barter for him or divide him among the merchants? | HINCV 6 क्या व्यापारी उसके लिए विनिमय करना चाहेंगे? क्या व्यापारी अपने लिए परस्पर उसका विभाजन कर सकेंगे? |
| BSB 7 Can you fill his hide with harpoons or his head with fishing spears? | HINCV 7 क्या तुम उसकी खाल को बर्छी से बेध सकते हो अथवा उसके सिर को भाले से नष्ट कर सकते हो? |
| BSB 8 If you lay a hand on him, you will remember the battle and never repeat it! | HINCV 8 बस, एक ही बार उस पर अपना हाथ रखकर देखो, दूसरी बार तुम्हें यह करने का साहस न होगा. उसके साथ का संघर्ष तुम्हारे लिए अविस्मरणीय रहेगा. |
| BSB 9 Surely hope of overcoming him is false. Is not the sight of him overwhelming? | HINCV 9 व्यर्थ है तुम्हारी यह अपेक्षा, कि तुम उसे अपने अधिकार में कर लोगे; तुम तो उसके सामने आते ही गिर जाओगे. |
| BSB 10 No one is so fierce as to rouse Leviathan. Then who is able to stand against Me? | HINCV 10 कोई भी उसे उकसाने का ढाढस नहीं कर सकता. तब कौन करेगा उसका सामना? |
| BSB 11 Who has given to Me that I should repay him? Everything under heaven is Mine. | HINCV 11 उस पर आक्रमण करने के बाद कौन सुरक्षित रह सकता है? आकाश के नीचे की हर एक वस्तु मेरी ही है. |
| BSB 12 I cannot keep silent about his limbs, his power and graceful form. | HINCV 12 “उसके अंगों का वर्णन न करने के विषय में मैं चुप रहूंगा, न ही उसकी बड़ी शक्ति तथा उसके सुंदर देह का. |
| BSB 13 Who can strip off his outer coat? Who can approach him with a bridle? | HINCV 13 कौन उसके बाह्य आवरण को उतार सकता है? कौन इसके लिए साहस करेगा कि उसमें बागडोर डाल सके? |
| BSB 14 Who can open his jaws, ringed by his fearsome teeth? | HINCV 14 कौन उसके मुख के द्वार खोलने में समर्थ होगा, जो उसके भयावह दांतों से घिरा है? |
| BSB 15 His rows of scales are his pride, tightly sealed together. | HINCV 15 उसकी पीठ पर ढालें पंक्तिबद्ध रूप से बिछी हुई हैं और ये अत्यंत दृढतापूर्वक वहां लगी हुई हैं; |
| BSB 16 One scale is so near to another that no air can pass between them. | HINCV 16 वे इस रीति से एक दूसरे से सटी हुई हैं, कि इनमें से वायु तक नहीं निकल सकती. |
| BSB 17 They are joined to one another; they clasp and cannot be separated. | HINCV 17 वे सभी एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं उन्होंने एक दूसरे को ऐसा जकड़ रखा है; कि इन्हें तोड़ा नहीं जा सकता. |
| BSB 18 His snorting flashes with light, and his eyes are like the rays of dawn. | HINCV 18 उसकी छींक तो आग की लपटें प्रक्षेपित कर देती है; तथा उसके नेत्र उषाकिरण समान दिखते हैं. |
| BSB 19 Firebrands stream from his mouth; fiery sparks shoot forth! | HINCV 19 उसके मुख से ज्वलंत मशालें प्रकट रहती; तथा इनके साथ चिंगारियां भी झड़ती रहती हैं. |
| BSB 20 Smoke billows from his nostrils as from a boiling pot over burning reeds. | HINCV 20 उसके नाक से धुआं उठता रहता है, मानो किसी उबलते पात्र से, जो जलते हुए सरकंडों के ऊपर रखा हुआ है. |
| BSB 21 His breath sets coals ablaze, and flames pour from his mouth. | HINCV 21 उसकी श्वास कोयलों को प्रज्वलित कर देती, उसके मुख से अग्निशिखा निकलती रहती है. |
| BSB 22 Strength resides in his neck, and dismay leaps before him. | HINCV 22 उसके गर्दन में शक्ति का निवास है, तो उसके आगे-आगे निराशा बढ़ती जाती है. |
| BSB 23 The folds of his flesh are tightly joined; they are firm and immovable. | HINCV 23 उसकी मांसपेशियां उसकी देह पर अचल एवं दृढ़, |
| BSB 24 His chest is as hard as a rock, as hard as a lower millstone! | HINCV 24 और उसका हृदय तो पत्थर समान कठोर है! हां! चक्की के निचले पाट के पत्थर समान! |
| BSB 25 When Leviathan rises up, the mighty are terrified; they withdraw before his thrashing. | HINCV 25 जब-जब वह उठकर खड़ा होता है, शूरवीर भयभीत हो जाते हैं. उसके प्रहार के भय से वे पीछे हट जाते हैं. |
| BSB 26 The sword that reaches him has no effect, nor does the spear or dart or arrow. | HINCV 26 उस पर जिस किसी तलवार से प्रहार किया जाता है, वह प्रभावहीन रह जाती है, वैसे ही उस पर बर्छी, भाले तथा बाण भी. |
| BSB 27 He regards iron as straw and bronze as rotten wood. | HINCV 27 उसके सामने लौह भूसा समान होता है, तथा कांसा सड़ रहे लकड़ी के समान. |
| BSB 28 No arrow can make him flee; slingstones become like chaff to him. | HINCV 28 बाण का भय उसे भगा नहीं सकता. गोफन प्रक्षेपित पत्थर तो उसके सामने काटी उपज के ठूंठ प्रहार समान होता है. |
| BSB 29 A club is regarded as straw, and he laughs at the sound of the lance. | HINCV 29 लाठी का प्रहार भी ठूंठ के प्रहार समान होता है, वह तो बर्छी की ध्वनि सुन हंसने लगता है. |
| BSB 30 His undersides are jagged potsherds, spreading out the mud like a threshing sledge. | HINCV 30 उसके पेट पर जो झुरिया हैं, वे मिट्टी के टूटे ठीकरे समान हैं. कीचड़ पर चलते हुए वह ऐसा लगता है, मानो वह अनाज कुटने का पट्टा समान चिन्ह छोड़ रहा है. |
| BSB 31 He makes the depths seethe like a cauldron; he makes the sea like a jar of ointment. | HINCV 31 उसके प्रभाव से महासागर जल, ऐसा दिखता है मानो हांड़ी में उफान आ गया हो. तब सागर ऐसा हो जाता, मानो वह मरहम का पात्र हो. |
| BSB 32 He leaves a glistening wake behind him; one would think the deep had white hair! | HINCV 32 वह अपने पीछे एक चमकीली लकीर छोड़ता जाता है यह दृश्य ऐसा हो जाता है, मानो यह किसी वृद्ध का सिर है. |
| BSB 33 Nothing on earth is his equal—a creature devoid of fear! | HINCV 33 पृथ्वी पर उसके जैसा कुछ भी नहीं है; एकमात्र निर्भीक रचना! |
| BSB 34 He looks down on all the haughty; he is king over all the proud.” | HINCV 34 उसके आंकलन में सर्वोच्च रचनाएं भी नगण्य हैं; वह समस्त अहंकारियों का राजा है.” |
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